रिपोर्ट बबलू सेंगर

Jalaun news today । शिक्षा का प्रसार व प्रचार करने के नाम पर पंजीकरण कराने व मान्यता प्राप्त कराने वाले प्राइवेट स्कूल व्यापार करने में लगे हैं। समाजसेवा के व्यापार बनने के कारण इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक परेशान हैं। विद्या के मंदिर कहे जाने वाले स्कूलों के संचालकों द्वारा पुस्तकों के नाम पर कई जा रही मनमानी व वसूली जा रही कीमतों से नाराज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारियों ने एसडीएम से रोक लगाने की मांग की है।
सरकार एक तरफ विभिन्न प्रचार माध्यमों से उपभोक्ताओं को जागरूक कर रही है। वहीं दूसरी ओर खुले स्कूल संचालकों व पुस्तक विक्रेताओं से लुटने को मजबूर उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है। सरकार से मान्यता लेते समय व सोसायटी का पंजीकरण कराते समय संचालक शिक्षा का प्रसार व प्रसार करना उदेश्य बताते हैं। मान्यता मिलते ही वह अपने उद्देश्य को भूल जाते हैं और लक्ष्य सिर्फ धनोपार्जन बना लेते हैं। विद्या के मंदिरों के व्यापारिक प्रतिष्ठान बनने से जनता परेशान हैं। सरकार ने भले ही एनसीआरटी का पाठ्यक्रम चलाने के कहा हो किन्तु प्राइवेट स्कूलों में किताबों के नाम पर मनमर्जी चल रही है। अभिभावकों से पुस्तकों के नाम पर मची लूट से आहत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रांत सह संयोजक सत्यम याज्ञिक, गोपालजी बाथम नगर सहमंत्री, निखिल बाथम पूर्व प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य, हरिओम पटेल, आदित्य ह्रदय ने एसडीएम से मांग की गयी है नगर व आसपास संचालित स्कूलों में मनमानी चल रही है। बच्चों को या तो स्कूल से या एक निर्धारित दुकान से महंगी किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। औने पौने दाम प्रिंट वाली किताबों की खरीद पर कोई छूट नहीं दी जा रही है। छूट मांगने पर अभिभावक को भगा दिया जाता है। स्कूल में पाठ्यक्रम निर्धारित न होकर प्रकाशक निर्धारित किया जा रहा है और अभिभावकों को लूटा जा रहा है। छात्रों ने उपजिलाधिकारी से पुस्तकों के नाम मची लूट को कम कराने की मांग की है।





