
रिपोर्ट बबलू सेंगर
Jalaun news today । व्यक्ति का बचपन कच्चे मिट्टी की तरह होता है उसे जैसा चाहे वैसा पात्र बनाया जा सकता है। पाप के बाद कोई व्यक्ति नरकगामी हो, इसके लिए श्रीमद् भागवत में श्रेष्ठ उपाय प्रायश्चित बताया गया है। यह बात चौधरयाना स्थित गुप्ता भवन पर आयोजित साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा वाचक डॉ. शिवसंपत द्विवेदी ने कही।
तीसरे दिन कथा वाचक डॉ. शिव संपत द्विवेदी ने श्रोताओं को बताया कि राजा उत्तानपाद के वंश में ध्रुव हुए हैं। ध्रुव की सौतेली मां सुरुचि के द्वारा अपमानित होने पर भी उनकी मां सुनीति ने धैर्य नहीं खोया। जिससे एक बड़ा संकट टल गया। भक्ति को बचपन में ही करने की प्रेरणा देनी चाहिए। परिवार को बचाए रखने के लिए धैर्य संयम की नितांत आवश्यकता रहती है। भगवान नृसिंह रुप में लोहे के खंभे को फाड़कर प्रकट होना बताता है कि प्रह्लाद को विश्वास था कि भगवान इस लोहे के खंभे में भी हैं और उस विश्वास को पूर्ण करने के लिए भगवान उसी में से प्रकट हुए व हिरण्यकश्यप का वध करके भक्त प्रह्लाद के प्राणों की रक्षा की। इस मौके पर पारीक्षित किरन गुप्ता, किंकल अनुपम गुप्ता, बॉबी, मंजू, आशीष, अरविंद गुप्ता, गौरी गुप्ता, आदित्य, सक्षम, रुचि गुप्ता, केके गुप्ता,समता गुप्ता, शुचि गुप्ता आदि रहे।




