अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन के समय शहीद हुए तुलसीराम प्रजापति के घर पहुंचे विश्व हिन्दू परिषद के पदाधिकारी,,परिजनों को दिए पूजित अक्षत व पत्रक
(रिपोर्ट – बबलू सेंगर)

Jalaun news today । अयोध्या में शहीद हुए तहसील क्षेत्र के ग्राम गिधौसा व धंतौली के दो कारसेवकों के परिजनों के यहां विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों ने पहुंचकर उन्हें श्रृद्धांजलि दी और परिजनों को पूजित अक्षत व पत्रक देकर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम की जानकारी दी।

श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान अयोध्या में हुई कारसेवा के दौरान तहसील क्षेत्र के ग्राम गिधौसा निवासी साधु तुलसीराम प्रजापति गोली लगने से शहीद हो गए थे एवं धंतौली निवासी पुत्तू सिंह शिलालेख उखड़ते समय शिलालेख समेत जमीन पर आ गिरे थे और शिलालेख के नीचे आकर उनके प्राण चले गए थे। दोनों के शरीर भी परिजनों को नहीं मिले थे। उन्हें सरयू में प्रवाहित कर दिया गया था। लगभग एक पखवारे बाद सूचना मिलने पर अयोध्या पहुंचे परिजनों ने फोटो देखकर उनकी पहचान की थी। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद तुलसीराम प्रजापति के पुत्र रामकृष्ण प्रजापति व कृष्ण कुमार प्रजापति के यहां तत्कालीन कबीना मंत्री बाबूराम दादा ने तुलसीराम प्रजापति के घर पहुंचकर उन्हें एक लाख रुपये की चेक दी थी। उन रुपयों से उनके पुत्रों ने गांव में शंकरजी का मंदिर बनवाकर उसमें पिता की मूर्ति की स्थापना कराई थी।

अब जब अयोध्या में राममंदिर बनकर तैयार है 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा होनी है। सभी जगहों पर खुशी का माहौल है रामभक्त वर्षों की मेहनत सफल मान रहे हैं। ऐसे में इन शहीद के परिजनों को अयोध्या पहुंचने का आमंत्रण न मिलने से वह मायूस थे। इसकी खबर उत्तम पुकार न्यूज़ में प्रकाशित हुई थी। जिसका संज्ञान लेकर विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष महंत गुरूप्रसाद, प्रखण्ड अध्यक्ष कौशलेंद्र सिंह उर्फ रानू सिकरी, खंड समन्वयक व संपर्क प्रमुख कैलाशबाबू वर्मा देवरी, आलोक वर्मा प्रधान सिकरी राजा, विश्व हिंदू परिषद नगर अध्यक्ष अनुराग तिवारी, बजरंग दल नगर संयोजक मानवेद्र परिहार आदि धंतौली में पुत्तू सिंह के पुत्र कुशलपाल सिंह व नन्हेराजा एवं गिधौसा में तुलसीराम प्रजापति के पुत्र रामकृष्ण प्रजापति व कृष्ण कुमार प्रजापति से मिले और उन्हें पूजित अक्षत देकर प्राण प्रतिष्ठा का आमंत्रण दिया। इस दौरान उन्होंने दोनों शहीदों के चित्र पर फूल अर्पित कर उन्हें श्रृद्धांजलि भी दी।





