भागवत कथा के चौथे दिन आचार्य ने सुनाई ये सुंदर कथा,,भावविभोर हो नाचे भक्त

On the fourth day of Bhagwat Katha, Acharya narrated this beautiful story, the devotees danced with emotion.

(रिपोर्ट – बबलू सेंगर)

Jalaun news today । श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन की कथा में बालि वामन प्रसंग एवं श्रीकृष्ण जन्म कथा का रस्सवादन भक्तों ने किया। बालाजी मंदिर के पास आयोजित श्रीमद्भागवत कथा को सुनकर भक्त भावविभोर होकर नाचे।
हरीपुरा में चुर्खी रोड बालाजी मंदिर के पास आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन कथा व्यास पंडित राजेश द्विवेदी ने बालि वामन की कथा का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान के अवतार ने बालि से तीन पग भूमि मांगी थी और उन्होंने दो पग में ही आकाश व पाताल को नापकर बालि का अभिमान चूर कर दिया था। इसके बाद उन्होंने श्रीकृष्ण जन्म की कथा का वर्णन करते हुए बताया कि जब कंस का अहंकार बढ़ गया और वह अच्छाई और बुराई का भेद भूल गया तब भगवान को मनुष्य रूप में पृथ्वी पर प्रकट होना पड़ा। श्रीकृष्ण का मथुरा की जेल में प्राकट्य होने के बाद वासुदेव ने रातों-रात उन्हें गोकुल में नंद बाबा के यहां पहुंचा दिया और उनके यहां जन्मी पुत्री को देवकी की गोद में दे दिया। उधर, गोकुल में जैसे ही सुबह सभी जागे तो नंदबाबा के यहां लाला का जन्म होने की बात पता चलते ही पूरा गोकुल जश्न मनाने लगा। सभी ब्रजवासी नाचते-झूमते हुए ‘नन्द घर आनन्द भयो, जय कन्हैया लाल की’ गाते हुए मस्त हो रहे थे। इस दौरान बीच-बीच में संगीतमय भजनों की प्रस्तुति से बैठे श्रोतागण झूम कर भक्तिभाव से नृत्य भी कर रहे थे। इस मौके पर पारीक्षित सिद्धनारायण, गीता देवी, प्रमोद,अंबिका, नारायण दास, राहुल लाक्षाकार, ध्रुव, धीरज आदि भक्त मौजूद रहे।

15 से 21 दिसंबर तक होगा भागवत कथा का आयोजन

जालौन। अखंड परमधाम सेवा समिति के तत्वावधान में श्रीश्री 1008 स्वामी परमानंद गिरीजी महाराज की अध्यक्षता में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह दिनांक 15 दिसंबर दिन शुक्रवार से 21 दिसंबर दिन मंगलवार तक उरई रोड स्थित स्वामी विवेकानंद इंटर कॉलेज में होगा। जिसमें कथा व्यास महामंडलेश्वर ज्योतिर्मयानंदजी महाराज भक्तों को कथा श्रवण कराएंगे। शुक्रवार को कलश यात्रा दोपहर एक बजे द्वारिकाधीश मंदिर प्रांगण से शुरू होकर नगर के विभिन्न मंदिरों से होकर कथा स्थल पर पहुंचेगी। यह जानकारी पारीक्षिम महेंद्र सिंह उर्फ मनसुख दादी ने दी है।

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