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रिपोर्ट बबलू सेंगर
जालौन। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर ओवरलोड वाहनों का संचालन रोकने में जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। चर्चा है कि डकोर और उरई के अलग-अलग स्थानों से बालू और गिट्टी से लदे भारी वाहनों के एक्सप्रेसवे पर चढ़ने की बात सामने आई है इससे सड़क की सुरक्षा और ओवरलोडिंग पर अंकुश लगाने की व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है।

स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के मुताबिक, बालू से लदे वाहन डकोर के किलोमीटर 164 के पास से, जबकि गिट्टी से लदे वाहन उरई के किलोमीटर 174 के पास से एक्सप्रेसवे पर चढ़ते हैं। इन वाहनों के निर्धारित क्षमता से अधिक भार लेकर चलने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इसकी पुष्टि के लिए वाहनों के वजन की जांच जरूरी है।
ओवरलोडिंग से सड़क को नुकसान, हादसों का खतरा
ओवरलोड वाहनों के संचालन से सड़क पर दबाव बढ़ता है। इससे सड़क की स्थिति प्रभावित होने और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ने की आशंका रहती है। ऐसे में परिवहन विभाग और जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है कि नियमित जांच कराकर नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर कार्रवाई सुनिश्चित करें।

एक्सप्रेसवे पर भारी वाहनों की आवाजाही के बीच सवाल उठ रहा है कि ओवरलोडिंग रोकने के लिए प्रभावी निगरानी क्यों नहीं की जा रही है। डकोर के किलोमीटर 164 और उरई के किलोमीटर 174 के आसपास वाहनों की जांच की जाए तो स्थिति स्पष्ट हो सकती है। साथ ही, संबंधित विभागों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि निर्धारित क्षमता से अधिक भार लेकर चलने वाले वाहन एक्सप्रेसवे पर प्रवेश न कर सकें।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन, परिवहन विभाग और संबंधित अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। ओवरलोडिंग की निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई से ही सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में प्रभावी पहल हो सकेगी।




