
Jalaun news today । जालौन नगर के श्रीकृष्ण मंदिरों में श्रीराधाष्टमी को धूमधाम से श्रृद्धा भक्ति से मनाया गया। भगवान श्रीकृष्ण के साथ राधाजी की पूजा अर्चना कर प्रसाद वितरण किया गया।
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि श्रीराधाष्टमी के नाम से प्रसिद्ध है। शास्त्रों में इस तिथि को श्रीराधाजी का प्राकट्य दिवस माना गया है। श्रीराधाजी वृषभानु की यज्ञ भूमि से प्रकट हुई थीं। पंडित देवेंद्र दीक्षित बताते हैं कि वेद और पुराणादि में जिनका ‘कृष्ण वल्लभा’ कहकर गुणगान किया गया है, वे श्री वृन्दावनेश्वरी राधा सदा श्रीकृष्ण को आनन्द प्रदान करने वाली साध्वी कृष्णप्रिया थीं। शास्त्रों में श्रीराधा कृष्ण को शाश्वत शक्तिस्वरूपा एवं प्राणों की अधिष्ठात्री देवी के रूप में वर्णित किया गया है। राधाजी की पूजा के बिना श्रीकृष्ण की पूजा अधूरी मानी गई है। श्रीमद देवी भागवत के अनुसार श्रीराधा की पूजा न की जाए तो मनुष्य श्रीकृष्ण की पूजा का अधिकार नहीं रखता है। इसलिए समस्त वैष्णवों को चाहिए कि वे भगवती श्रीराधा की अर्चना अवश्य करें। नगर के श्रीकृष्ण मंदिर द्वारिकाधीश मंदिर, बंबई वाला मंदिर, मुरलीमनोहर में लालजी दास महंत का मंदिर, पैट्रोल पंप वाले हनुमानजी मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण व श्रीराधा रानी की विशेष पूजा अर्चना की गई। भजनों के साथ सामूहिक आरती की गई और प्रसाद वितरण किया गया।





