(रिपोर्ट – बबलू सेंगर)

Jalaun news today । अयोध्या में राममंदिर की प्रतिष्ठा को लेकर सभी लोगों में उत्साह है। लोगों को घर घर जाकर पूजित अक्षत का वितरण किया जा रहा है। लेकिन राम मंदिर आंदोलन के दौरान कारसेवकों पर चलाई गई गोली में तहसील क्षेत्र के दो लोगों ने अपने प्राणों की आहूति दी थी। लेकिन प्राण प्रतिष्ठा समारोह में उन शहीदों के परिजनों को भुला दिया गया है। इसको लेकर परिजनों में रोष है, लेकिन राममंदिर बनने पर उनमें उत्साह और खुशी है कि उनके परिजनों का बलिदान व्यर्थ नहीं गया।
अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बनकर तैयार हो रहा है। 22 जनवरी को रामलला भव्य मंदिर में विराजेंगे। ऐसे में मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर रामभक्तों में उत्साह और उल्लास का माहौल है। तहसील क्षेत्र में ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन में कारसेवक बनकर बलिदान दिया। जब 90 के दशक में भगवान श्रीराम के मंदिर का आंदोलन चल रहा था, उस दौरान देश के हजारों लोग कारसेवा में अयोध्या पहुंचे थे। इनमें से कुछ कारसेवक अपने घर नहीं लौट सके। इन्हीं में से जालौन जनपद के गिधौसा गांव निवासी साधु तुलसीराम प्रजापति व धंतौली निवासी पुत्तू सिंह भी थे।

पुत्तू सिंह के बेटे कुशलपाल सिंह ने बताया कि पिता घर पर बिना बताए राममंदिर आंदोलन में शामिल होने के लिए अयोध्या निकल गए थ और फिर कभी वह लौटकर नहीं आए। कई दिनों के बाद उनके शहीद होने की खबर मिली। वहीं, तुलसीराम प्रजापति के बेटे कृष्ण कुमार ने बताया कि जब लगभग एक पखवारे बाद बाबा के शहीद होेने की खबर घर पर मिली थी। जिसके बाद परिवार के लोग अयोध्या पहुंचे थे। जहां फोटो को देखकर बाबा की पहचान की गई थी। उनका शरीर सरयू में प्रवाहित कर दिया गया था। कारसेवकों पर गोली चलाए जाने के बाद भाजपा सरकार बनी तब तत्कालीन कबीना मंत्री बाबूराम एमकॉम घर पहुंचे थे और उन्होंने एक लाख रुपये की चैक भेंट की थी। जिससे उन्होंने गांव में शंकरजी का मंदिर बनवाया है और उसमें पिता की भी मूर्ति की स्थापना की गई है। यह मंदिर 26 मई 2001 को तैयार हुआ। कुशलपाल सिंह, कृष्ण कुमार ने बताया कि उन्हें बहुत गर्व होता है कि उनके पिता भगवान श्रीराम मंदिर के आंदोलन के शहीद हुए हैं। अब मेरे पिता का सपना साकार हो रहा है अयोध्या में राममंदिर बनकर तैयार है और 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा की जानी है ऐसे में परिवार के सभी सदस्य बहुत खुश हैं कि उनके पिता का बलिदान व्यर्थ नहीं गया है। राममंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही पिता की आत्मा को भी शांति मिलेगी।
इस खुशी के साथ ही उनका दुख भी छलक उठा। अयोध्या में कारसेवा में बलिदान देने वाले पिता के परिजन बताते हैं कि कारसेवकों के परिजनों को राममंदिर की प्राण प्रतिष्ठा पर उन्हें अयोध्या पहुंचने का आमंत्रण दिया गया है। लेकिन उनके परिवार को अब तक आमंत्रण नहीं मिला है। न तो कोई सरकारी नुमाइंदा उनके घर पहुंचा है और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने आकर उन्हें आमंत्रण दिया है। इस बात का दुख तो है लेकिन खुशी यह है कि उनके पिता ने जिस काम के लिए अपने प्राणो की आहूति दी थी वह सार्थक हो गई है। उन्हें गांव व क्षेत्र के लोगों से 22 जनवरी को दीपवली की तरह मनाने की अपील की है।





