एक्सप्रेस वे बनाने में लगी फर्म पर चला न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश का हंटर,यह था आरोप

रिपोर्ट बबलू सेंगर

Jalaun news today । बुंदेलखंड एक्सप्रेस निर्माण के दौरान वाहनों में डीजल डलवाने और डीजल की बकाया राशि का भुगतान जिस चेक के माध्यम से किया गया वह बाउंस हो गई। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने विपक्षी फर्म को तीन माह के कारावास और 4.55 लाख की चेक पर 6.58 लाख रुपये परिवादी को देने का आदेश दिया।
तोपखाना स्थित महेंद्र मोर्टस पेट्रोल टैंक के संचालक अलकक्षेंद्र सिंह ने न्यायिक मजिस्ट्रेट जावेद खाान की अदालत में परिवाद दायर कर आरोप लगाया था कि मेरठ की फर्म कामधेनु इंटरप्राइजेज के बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे निर्माण का कार्य कर रही थी। फर्म के संचालक ने उन्हें बताया कि काफी दिनों तक काम चलना है और मशीनरी में डीजल की आवश्कयता होगी। पर्ची के माध्यम से वह वाहनों में डीजल उपलब्ध करा दें। समय समय पर उनका भुगतान किया जाता रहेगा। फर्म द्वारा वर्ष 2020 में 10,54,633 रुपये का डीजल वाहनों में डलवाया गया। जिसका छह लाख रुपये भुगतान कर दिय ा गया। काम समाप्त होने के बाद शेष 4.55 लाख रुपये चेक के माध्यम से दिए गए। जब चेक बैंक में लगाई गई तो वह बाउंस हो गई। जब इस बाबत फर्म संचालक से कहा तो उसने अभद्रता करते हुए रुपये देने से इंकार कर दिया। मामले में गुण दोष और दोनों पक्षों को सुनकर न्यायिक मजिस्ट्रेट ने विपक्षी फर्म को चेक के एवज में 6.58 लाख रुपये नकद भुगतान करने और तीन मास के कारवास का आदेश दिया है।

जिलों से खबरें भेजने वाले साथी संपर्क कर सकते हैं: 9415795867 –8840345105