टोल प्लाजा पर ओवरलोड वाहनों से अतिरिक्त राशि लेने के बाद स्लिप न मिलने का आरोप,,नियम विरुद्ध काम कर रहे कर्मचारी

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रिपोर्ट बबलू सेंगर

जालौन। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर ओवरलोड वाहनों से शुल्क वसूली को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। टोल संचालन कर रही कंपनी के अंतर्गत ओवरलोड वाहनों से निर्धारित नियमों के अनुसार शुल्क लिए जाने और अतिरिक्त धनराशि की वसूली के कोई अक्षय य आधिकारिक रिकॉर्ड को लेकर शिकायत सामने आई है। आरोप है कि ओवरलोड वाहनों से निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप शुल्क लेने के बजाय सामान्य टोल पर्ची या फास्टैग के माध्यम से सामान्य टोल वसूला जा रहा है, जबकि ओवरलोड के नाम पर अतिरिक्त धनराशि लिए जाने की भी शिकायत है पर ली गयी अतिरिक्त राशि का कोई लिखित साक्ष्य नही दिए जा रहे हैं । हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

गजट के नियमों के पालन पर सवाल

उत्तर प्रदेश सरकार के 15 दिसंबर 2017 को जारी असाधारण गजट में नियम-10 के तहत ओवरलोडिंग के लिए शुल्क निर्धारण का प्रावधान बताया गया है। इसके अनुसार, निर्धारित अनुमत भार से अधिक लदे वाहन से अगली उच्च वाहन श्रेणी (नेक्स्ट हायर कैटेगरी) के अनुसार शुल्क लिया जाना है। नियम में यह भी प्रावधान है कि अतिरिक्त शुल्क जमा करने मात्र से ओवरलोड वाहन को एक्सप्रेसवे पर चलने की अनुमति नहीं मिल जाती, बल्कि निर्धारित सीमा से अधिक भार हटाना भी आवश्यक है।

अतिरिक्त वसूली का हिसाब कहां दर्ज है?

शिकायत में सबसे अहम सवाल यह उठाया गया है कि यदि ओवरलोड वाहनों से सामान्य टोल के अलावा अतिरिक्त धनराशि ली जा रही है, तो उसका हिसाब किस रिकॉर्ड में दर्ज किया जा रहा है। क्या अतिरिक्त शुल्क की अलग रसीद जारी की जा रही है? क्या पूरी धनराशि टोल सॉफ्टवेयर और आधिकारिक लेखा-जोखा में दर्ज हो रही है? इन बिंदुओं पर स्पष्टता की मांग की गई है।

शिकायतकर्ता की आशंका है कि यदि अतिरिक्त शुल्क की वसूली और उसका विवरण आधिकारिक सिस्टम में दर्ज नहीं हो रहा है, तो इससे टोल वसूली की पारदर्शिता और राजस्व के लेखा-जोखा को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में किसी अनियमितता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

टोल प्लाजा के रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग

मामले में संबंधित अधिकारियों से बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा पर वाहनों के वजन संबंधी रिकॉर्ड, जारी टोल पर्चियों, फास्टैग लेन-देन, नकद वसूली और टोल सॉफ्टवेयर के विवरण की जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही यह भी स्पष्ट करने की मांग उठाई गई है कि ओवरलोड वाहनों से अगली उच्च श्रेणी के अनुसार निर्धारित शुल्क लिया जा रहा है या नहीं और वसूली गई अतिरिक्त धनराशि का पूरा विवरण सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है या नहीं।

अब निगाहें संबंधित प्राधिकरण की कार्रवाई पर टिकी हैं। जांच के जरिए ही स्पष्ट हो सकेगा कि ओवरलोड वाहनों से शुल्क वसूली में निर्धारित नियमों का पालन हो रहा है या नहीं और शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।