सांसद चंद्रशेखर आज़ाद का हुंकार—गठबंधन के रास्ते खुले, इस बार नहीं बंटने देंगे वोट; किसानों की एकता और भाईचारा कायम करने का लिया संकल्प

UP news today । उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद के मीरापुर में आयोजित जनसभा एवं रैली के दौरान आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने सामाजिक एकता, लोकतंत्र, संविधान और आगामी राजनीतिक समीकरणों को लेकर जोरदार बयान दिया। उन्होंने गठबंधन की संभावनाओं पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि गठबंधन के रास्ते खुले हैं और इस बार वोटों को बंटने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने जनता से एकजुट होकर लोकतांत्रिक अधिकारों, सामाजिक न्याय और भाईचारे की लड़ाई को मजबूत करने का आह्वान किया।
सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने चुनाव आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता, पारदर्शिता और जनता के मताधिकार की रक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता के वोट की ताकत सर्वोपरि है और उसकी विश्वसनीयता बनाए रखना निर्वाचन व्यवस्था की जिम्मेदारी है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की किसान एकता और गंगा-जमुनी तहजीब का उल्लेख करते हुए चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा, “हमारा पश्चिमी उत्तर प्रदेश हमेशा से किसानों की एकता के लिए पूरे देश में चर्चित रहा है। किसान का मतलब किसान होता था, न कोई हिंदू, न मुस्लिम; न कोई बड़ा, न कोई छोटा। लेकिन यहां के प्रेम, भाईचारे और अमन-चैन में मौजूदा तानाशाहों ने जहर घोल दिया है। आज मैं उसी भाईचारे और किसानों की एकता को कायम करके नफरतवादियों को यहां की जमीन से खदेड़ने की शपथ के साथ आप सबके बीच आया हूं।”

उन्होंने कहा कि किसानों, मजदूरों, दलितों, पिछड़ों और धार्मिक अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के लिए सामाजिक एकता सबसे बड़ी ताकत है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की पहचान आपसी सद्भाव, किसान आंदोलन और साझा संघर्षों से रही है। इस एकता को कमजोर करने वाली राजनीति का लोकतांत्रिक तरीके से मुकाबला करना होगा।
26 नवंबर को संविधान दिवस के अवसर पर बहुजन स्वाराज संकल्प महारैली लखनऊ स्थित माता रमाबाई अंबेडकर मैदान में आयोजित होने वाले कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा, “कान खोलकर सुन लो मठ के मठाधीश! 26 नवंबर संविधान दिवस पर लखनऊ के माता रमाबाई मैदान में संविधानवादी नीले बाजों का जो ऐतिहासिक जनसैलाब उमड़ेगा, वो दलित-पिछड़ों और धार्मिक अल्पसंख्यकों का शोषण करने वाले तानाशाह की सत्ता की ताबूत में अंतिम कील ठोक देगा।”
उन्होंने कहा कि संविधान दिवस का यह आयोजन संविधान की मूल भावना, सामाजिक न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के प्रति जनसमर्पण का प्रतीक बनेगा। उन्होंने लोगों से बड़ी संख्या में पहुंचकर संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के संकल्प को मजबूत करने की अपील की।
सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने अपने संबोधन में स्पष्ट संदेश दिया कि राजनीतिक बदलाव की लड़ाई को सफल बनाने के लिए आपसी मतभेदों से ऊपर उठना होगा। किसानों की एकता, सामाजिक सद्भाव और बहुजन समाज की राजनीतिक भागीदारी को मजबूत करके ही लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की जा सकती है।